गुरुजी का परिचय और आश्रम का उद्देश्य

श्री रवि शंकर महाराज जी (गुरु भाई) एक सुप्रसिद्ध सनातन संत, वेद–पुराणों के ज्ञाता, कथावाचक एवं समाजसेवी हैं। वे पंचवटी श्री सीता राम आश्रम, ऋषिया बहराइच (उत्तर प्रदेश) के संस्थापक एवं संचालक हैं। गुरुजी का संपूर्ण जीवन भगवत सेवा, सनातन संस्कृति के संरक्षण और समाज कल्याण को समर्पित है।

गुरुजी को रामकथा, श्रीमद् भागवत कथा और शिव महापुराण कथा का गहन ज्ञान प्राप्त है। उनकी कथा शैली सरल, भावपूर्ण एवं जन-जन को जोड़ने वाली होती है, जिससे श्रोता सहज ही धर्म, भक्ति और संस्कार के मार्ग से जुड़ जाते हैं। कथा के माध्यम से वे केवल धार्मिक ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि जीवन को सत्य, सेवा और सदाचार के पथ पर चलने की प्रेरणा भी प्रदान करते हैं।

रामकथा के माध्यम से गुरुजी मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्श जीवन, त्याग और कर्तव्यबोध का संदेश देते हैं।
श्रीमद् भागवत कथा के द्वारा वे भक्ति, प्रेम और ज्ञान का अमृतपान कराते हैं, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं के माध्यम से मानव जीवन का गूढ़ रहस्य समझाया जाता है।
शिव महापुराण कथा के माध्यम से वैराग्य, तप, साधना और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

गुरुजी केवल कथावाचक ही नहीं, बल्कि एक समर्पित समाजसेवक भी हैं। उनके मार्गदर्शन में आश्रम द्वारा अनेक जनकल्याणकारी कार्य निरंतर किए जा रहे हैं। निर्धनों को भोजन उपलब्ध कराने हेतु अन्नपूर्णा सेवा, सैकड़ों बच्चों के लिए निःशुल्क शिक्षा, असहाय कन्याओं के विवाह, गौ सेवा एवं पशु चिकित्सा, वृक्षारोपण, कंप्यूटर एवं सिलाई प्रशिक्षण केंद्र जैसी सेवाएँ गुरुजी की प्रेरणा से संचालित हो रही हैं।

गुरुजी का स्पष्ट संदेश है—
“भक्ति वही सार्थक है, जो सेवा के रूप में प्रकट हो।”
इसी भावना के साथ वे समाज के अंतिम व्यक्ति तक सहायता पहुँचाने का संकल्प लेकर कार्य कर रहे हैं।

पंचवटी श्री सीता राम आश्रम गुरुजी के नेतृत्व में आज एक ऐसा केंद्र बन चुका है, जहाँ धर्म, भक्ति, सेवा और संस्कार का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। गुरुजी का जीवन सनातन धर्म के प्रति अटूट आस्था, मानवता के प्रति करुणा और समाज के प्रति उत्तरदायित्व का जीवंत उदाहरण है।

Scroll to Top