सेवा : सनातन धर्म का मूल आधार

सनातन धर्म में सेवा को ही सच्ची साधना माना गया है।
शास्त्रों में कहा गया है —
“नर सेवा नारायण सेवा”
अर्थात मानव की सेवा ही ईश्वर की सच्ची पूजा है।

सेवा वह मार्ग है, जो मनुष्य को आत्मिक शांति, समाज को समरसता और जीवन को सार्थकता प्रदान करता है। जब भक्ति सेवा से जुड़ती है, तब धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रहता, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचता है।

पंचवटी श्री सीता राम आश्रम इसी सनातन भावना के साथ सेवा को अपना मूल संकल्प मानकर कार्य कर रहा है। परम पूज्य श्री रवि शंकर महाराज जी (गुरु भाई) की प्रेरणा से आश्रम द्वारा अनेक सेवाएँ जमीनी स्तर पर, निरंतर और निःस्वार्थ भाव से संचालित की जा रही हैं।

अन्नपूर्णा रसोई – निर्धनों को निःशुल्क भोजन

अन्नपूर्णा सेवा

उद्देश्य कोई भी व्यक्ति भूखा न सोए — यही अन्नपूर्णा सेवा का मुख्य उद्देश्य है। प्रेरणा गुरुजी का स्पष्ट संदेश है कि “भूखे को भोजन कराना सबसे बड़ा यज्ञ है।” जमीनी कार्य आश्रम द्वारा 12 से अधिक अन्नपूर्णा रसोइयों के माध्यम से निर्धन, असहाय, वृद्ध, साधु-संत एवं जरूरतमंद लोगों को प्रतिदिन सात्विक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। यह सेवा पूर्ण स्वच्छता, अनुशासन और सेवा भाव के साथ सफलतापूर्वक संचालित हो रही है।

वैदिक शिक्षा केंद्र

निःशुल्क शिक्षा सेवा

उद्देश्य बच्चों को शिक्षा और संस्कार देकर उज्ज्वल भविष्य की ओर ले जाना। प्रेरणा गुरुजी मानते हैं कि “शिक्षा ही समाज को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाती है।” जमीनी कार्य आश्रम द्वारा सैकड़ों बच्चों को निःशुल्क वैदिक एवं आधुनिक शिक्षा प्रदान की जा रही है। इसके साथ कंप्यूटर शिक्षा, संस्कार शिक्षा और नैतिक मूल्यों पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

बेसहारा बेटियों का विवाह – सामाजिक रूप से सहयोग

बेसहारा कन्या विवाह सेवा

उद्देश्य निर्धन एवं असहाय कन्याओं को सम्मानजनक जीवन देना। प्रेरणा गुरुजी के अनुसार “कन्या की सहायता करना समाज की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।” जमीनी कार्य आश्रम द्वारा अनेक कन्याओं के विवाह पूरे विधि-विधान से संपन्न कराए गए हैं, जिसमें वस्त्र, भोजन एवं आवश्यक व्यवस्थाएँ प्रदान की जाती हैं।

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गौ सेवा एवं पशु सेवा

उद्देश्य गौ माता एवं असहाय पशुओं की रक्षा और सेवा। प्रेरणा सनातन धर्म में गौ सेवा को पुण्य का सर्वोच्च मार्ग माना गया है। जमीनी कार्य बीमार पशुओं का उपचार, नियमित भोजन-पानी की व्यवस्था एवं संरक्षण कार्य निरंतर किए जा रहे हैं।

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वृक्षारोपण एवं पर्यावरण सेवा

उद्देश्य प्रकृति संरक्षण एवं पर्यावरण संतुलन। प्रेरणा गुरुजी का मानना है कि “प्रकृति की सेवा ही आने वाली पीढ़ियों की रक्षा है।” जमीनी कार्य नियमित वृक्षारोपण अभियान चलाकर पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय योगदान दिया जा रहा है।

कप्यूटर केंद्र

आत्मनिर्भरता प्रशिक्षण (कंप्यूटर व सिलाई केंद्र)

उद्देश्य युवाओं एवं महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना। प्रेरणा सेवा तभी पूर्ण होती है जब व्यक्ति स्वावलंबी बने। जमीनी कार्य कई शहरों में कंप्यूटर सेंटर एवं सिलाई केंद्र सफलतापूर्वक संचालित किए जा रहे हैं।

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मंदिर जीर्णोद्धार एवं धार्मिक सेवा

उद्देश्य धार्मिक स्थलों की गरिमा और व्यवस्था बनाए रखना। प्रेरणा मंदिर समाज की आस्था और संस्कृति का केंद्र होते हैं। जमीनी कार्य प्रत्येक माह किसी न किसी मंदिर का जीर्णोद्धार, स्वच्छता एवं पूजा व्यवस्था का संकल्प पूर्ण किया जा रहा है।

सेवा हेतु विनम्र अपील

सनातन धर्म में सेवा को सर्वोच्च स्थान दिया गया है।
सेवा वह साधना है, जो मनुष्य के हृदय को करुणा से भर देती है और समाज में समरसता स्थापित करती है। पंचवटी श्री सीता राम आश्रम द्वारा संचालित समस्त सेवाएँ—चाहे वह अन्नदान हो, शिक्षादान, गौ सेवा, कन्या सेवा, पर्यावरण सेवा या मंदिर सेवा—पूर्ण निष्ठा और निःस्वार्थ भाव से जमीनी स्तर पर निरंतर संचालित की जा रही हैं

इन सभी सेवाओं का उद्देश्य किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक सहायता पहुँचाना है। यह कार्य आपके सहयोग के बिना संभव नहीं हो सकता। आपका छोटा सा योगदान भी किसी भूखे को भोजन, किसी बच्चे को शिक्षा, किसी असहाय को सहारा और किसी मंदिर को संबल प्रदान कर सकता है।

यदि आप किसी भी प्रकार की सेवा में अपना सहयोग देना चाहते हैं, तो कृपया नीचे दिए गए आश्रम के खाते पर भुगतान कर सकते हैं। आपका दान पूर्णतः सेवा कार्यों में ही उपयोग किया जाएगा।

आपका यह सहयोग केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि मानवता, धर्म और संस्कारों के प्रति आपकी आस्था का प्रतीक है।

🙏 आइए, सेवा को संकल्प बनाएं और सनातन धर्म की इस पावन यात्रा में सहभागी बनें।

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